28 दिसंबर 2019 - 15:42
सीएए का विरोध करने वालों पर बरसे आर्मी चीफ़, सेना से उठा विरोध, पद की चाह इन्सान से क्या-क्या करवा लेती है!!!

भारतीय सेना प्रमुख बिपिन राऊत ने देश में विवादित नागरिकता क़ानून के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र सहित उग्र भीड़ का नेतृत्व करना, लीडरशिप नहीं है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आर्मी चीफ़ के बयान के बाद उन्हें रिटायर्ड और हाज़िर सर्विस सैन्य अधिकारियों की ओर से भीषण आलोचनाओं का सामना है।

उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ़ विवादित क़ानून से संबंधित राजनैतिक बहस में परिणामहीन हस्तक्षेप कर रहे हैं।

हेल्थकेयर लीडरशिप सम्मिट को संबोधित करते हुए आर्मी चीफ़ जनरल बिपिन राऊतने कहा कि नेता वह लोग नहीं हैं जो लोगों को अनुचित दिशाओं की ओर ले जाते हैं, हम बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों के छात्रों में गवाही दे रहे हैं कि यह नेतृत्व नहीं है।

उन्होंने कहा कि नेता वह व्यक्ति होता है जो आपको सही दिशा की ओर ले जाता है, आपको सही सलाह देता है और फिर इस बात को सुनिश्चित बनाता है कि उन लोगों की देखभाल करे जिनका वह नेतृत्व करता है, इसीलिए हमारी व्यक्तिगत मिसाल है जो हमें सशस्त्र सेना को गौरवपूर्ण बनाती है।

ज्ञात रहे कि आर्मी चीफ़ जनरल बिपिन राऊत 31 दिसम्बर को रिटायर्ड हो हरे हैं और उसके बाद वह पहले चीफ़ आफ़ डिफ़ेंस का पदभार संभालेंगे।

सेना के रिटायर्ड अधिकारियों ने आर्मी चीफ़ के बयान पर बल दिया कि सशस्त्र सेना को अपने ग़ैर राजनैतिक और सेक्युलर शिष्टाचार के साथ गर्व करना चाहिए, आर्मी चीफ़ ने सीएए के विरुद्ध जारी प्रदर्शनों के विरुद्ध सार्वजनिक दृष्टिकोण अपनाते हुए फिर से लाइन पार कर ली है।

पूर्व नौसेना प्रमुख रिटायर्ड एडमिरल एल रामदास ने कहा कि जनरल राऊत के बयान स्पष्ट रूप से ग़लत थे।

उन्होंने बल दिया कि सशस्त्र सेना के कर्मियों को देश की सेवा करने के दशकों पुराने सिद्धांत पर अमल करना चाहिए न कि किसी राजनैतिक शक्ति के।

एक सीनियर हाज़िर सर्विस अधिकारी ने कहा कि भारतीय आर्मी बहुत ही राजनैतिक होती जा रही है।

उनका कहना था कि सर्जिकल स्ट्राइक और जारी वर्ष फ़रवरी में बालाकोट के हवाई हमलों से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक सब ने चुनावी सभा में भारतीय सेना को "मोदी जी की सेना" क़रार दिया।

एक और अधिकारी ने कहा कि खेद की बात यह है कि सीनियर अधिकारी अपनी सेना में उच्च पदों के लिए हाथपैर मार रहे हैं और बहुत से लोगों का ख़याल है कि वह सही राजनैतिक संबंध या सरकार के समर्थन में बयान देने से तरक़्क़ी हासिल कर सकते हैं।